| ISBN | 9789352665525 |
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| Lekhak | |
| Prakashak |
गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएँ
150.00
यह पुस्तक भारतीय इतिहास की उन नींव के पत्थरों के बारे में है, जिनके योगदान को आज की पीढ़ी न के बराबर जानती है। उन गुमनाम नायकों में एक को भगतसिंह अपना गुरु मानते थे और उनकी फोटो हमेशा अपनी जेब में रखते थे और जो भगतसिंह से चार साल छोटी उम्र में ही फाँसी चढ़ गए थे। एक 18 साल की वह लड़की थी, जो बोर्ड टॉपर थी, उसने एक ऐसे क्लब पर धावा बोलकर अपनी जान दे दी, जिसके बाहर लिखा था—इंडियंस ऐंड डॉग्स आर नॉट एलाउड। एक ऐसा आदिवासी नायक, जिसने जल, जंगल और जमीन का नारा दिया था। एक ऐसा युवक, जिसने सबसे बड़े अंग्रेज अधिकारी का गला काट दिया, एक ऐसी विदेशी महिला, जिसने भारत का पहला झंडा डिजाइन किया, भारत की नंबर एक यूनिवर्सिटी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस शुरू करने में टाटा की मदद की। सन् 1857 का एक ऐसा नायक, जो 80 साल का था, कई बार अंगे्रजों को हराया, लेकिन जिंदा नहीं पकड़ा गया। एक ऐसा नायक, जिसे भारत के टाइटेनिक कांड के लिए जाना जाता है।
प्रेरणा और दिशा देनेवाले अनजान-गुमनाम नायकों की ये गाथाएँ हमारे अतीत से हमें जोड़ेंगी और भविष्य के लिए हमारा मार्ग प्रशस्त करेंगी।
विष्णु शर्मा आईटीवी मीडिया ग्रुप (इंडिया न्यूज, न्यूज एक्स) में कार्यरत है। एबीपी न्यूज चैनल उन्हें 2016 के सर्वेश्रेष्ठ ब्लॉगर सम्मान से पुरस्कृत कर चुका है। वे इतिहास, आरएसएस, बॉलीवुड और व्यंग्य से संबंधित ब्लॉग्स लिखते हैं, वीडियोज भी बनाते हैं। ये पुरस्कार उन्हें उनके इतिहास के ब्लॉग https://itihasgawaah.word press.com/ के लिए मिला था। विष्णु शर्मा फेसबुक पर इतिहास का एक पेज (https://www.facebook.com/CorrectHistory/) भी चलाते हैं, जिसके अभी 75 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इतिहास पर उनके वीडियोज आईटीवी ग्रुप के यूट्यूब चैनल inKhabarHistory पर देखे जा सकते हैं। विष्णु शर्मा इतिहास से एम.फिल. हैं और नेट भी क्वालीफाई कर चुके हैं। इससे पहले वे दैनिक जागरण आगरा, अमर उजाला नोएडा, न्यूज 24 नोएडा और ई24 मुंबई में काम कर चुके हैं। बीएजी फिल्म्स के बॉलीवुड न्यूज चैनल ई24 की लॉञ्चिंग में उनकी अहम भूमिका रही। वे चिल्ड्रन एनीमेशन फिल्म ‘द फोर्थ ईडियट’ के गाने और डायलॉग्स भी लिख चुके हैं, जिसके सूत्रधार थे ‘थ्री ईडियट’ के चतुर यानी ओमी वैद्या। इससे पहले उनकी इतिहास पर एक और पुस्तक ‘गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएँ’ प्रकाशित हो चुकी है।






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