| Lekhak | |
|---|---|
| Prakashak |
राज से स्वराज
350.00
भारत में उपनिवेशवाद और राष्ट्रवाद के इतिहास को ‘राज से स्वराज’ में लिपिबद्ध किया गया है। साथ ही इस पुस्तक में कुछ सैद्धांतिक प्रश्नों पर भी विचार किया गया है। भारत की गुलामी की कहानी जितनी दर्दनाक और हृदय-विदारक है, उतना ही रोमांचकारी है इसका स्वतंत्रता संग्राम। अपने अद्वितीय नेतृत्व-क्षमता, गौरवमयी गाथा और अहिंसक वैचारिक आधार के चलते भारत की आजादी की लड़ाई इतिहासकारों का ध्यान बरबस आकर्षित करती रही है।
यह पुस्तक मूलतः स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए उच्चस्तरीय और प्रामाणिक पाठ्यपुस्तक के रूप में प्रकाशित की गई है। यह लेखक के जीवनपर्यंत शोध, अध्ययन और अध्यापन की निष्पत्ति है। इस विषय पर उपलब्ध पुस्तकों से इसे कुछ अलग रखने का प्रयास किया गया है। इसमें घटनाक्रम के स्थान पर विषयानुकूल लेखन पद्धति को अपनाया गया है। साथ ही, इसमें आधुनिक भारत के इतिहास के हर पहलू और पक्ष पर गंभीरता से विचार किया गया है। अपनी रोचक शैली, संप्रेषण की सहजता और भाषा प्रवाह के चलते यह पुस्तक पठनीय-माननीय बन गई है।
अंग्रेजी में इस पुस्तक के अनेक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। पाठकों की माँग पर इसका हिंदी का यह संवर्द्धित-परिवर्द्धित संस्करण प्रकाशित किया जा रहा है। यह पुस्तक राजनीति विज्ञान तथा आधुनिक भारत के इतिहास के छात्रों के साथ-साथ सामान्य पाठकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी साबित होगी।
रामचंद्र प्रधान एक जाने-माने समाजशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में उन्होंने लगभग चार दशकों तक अध्यापन का कार्य किया है। उन्हें सीनियर फुलब्राइट फेलोशिप और इंडो-कनाडियन शास्त्री फेलोशिप भी प्राप्त हैं। अपनी कई विश्व यात्राओं के दौरान उन्होंने अनेकों चिंतकों के साथ परिसंवाद किया है। वे इंस्टीट्यूट फॉर गांधियन स्टडीज, वर्धा में अवैतनिक अध्यापन का काम करते हैं। आजकल वे भारतीय समाजवादी आंदोलन पर विस्तृत शोधकार्य में संलग्न हैं।

Ek Samarpit Vyaktitva Pandit Dindayal Upadhyay
Vibhajan ni karunantika
Prarthna Ek Mantra
Govind Guru 




Reviews
There are no reviews yet.