| ISBN | 9789350481790 |
|---|---|
| Lekhak | |
| Pages | 264 |
| Prakashak |
शिवाजी & सुराज
400.00
भारत केवल सौदागरों के खेल का मैदान बन गया है, यह कटु है, पर सत्य है। शिवाजी महाराज की राजनीति और राज्यनीति मानों अमृत और संजीवनी दोनों ही हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन व्यवस्था एक सप्रयोग सिद्ध किया हुआ महाप्रकल्प ही है। श्री अनिल दबे ने इस पुस्तक में हमें उसी से परिचित करवाया है। भारत की संसद और प्रत्येक विधानसभा के सदस्य को इस पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए।
बाबा साहेब पुरंदरे, पुणे
* राजा को (नेतृत्वकर्ता ने) स्वयं के खाने-पीने का समय निश्चित करना चाहिए। सामान्यत: उसे नहीं बतलाना चाहिए। राजा को नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। अपने आस-पास कार्यरत व्यक्तियों को भी इन पदार्थों का सेवन नहीं करने देना चाहिए। राजा के पास जब शस्त्र न हो तो उसे लंबे यमस तक निरंतर धरती को नहीं देखते रहना चाहिए।
* कार्य के प्रारंभ में शपथ लेते समय उसका (नायक का) स्वकोष व राज कोष कितना था? और जब वह निवृत होकर गया तब दोनों कोष की क्या स्थिती थी? इनका अंतर ही उसका वित्तिय चरित्र है।
* शिवाजी—”कान्होजी, आपको इसे मृत्युदंड न देने का वचन दिया था सो उसका पालन किया लेकिन कोई भी सजा (खंडोजी खेपडा को) न दी जाती तो स्वराज में लोगों को क्या संदेश जाता कि देशद्रोह और परिचय में परिचय बड़ा है! क्या यह स्वराज के लिए उचित होता?’ ’
* प्रत्येक नायक का यह प्रथम कर्तव्य है कि वह गद्दार को सबसे पहले अपनी व्यवस्था से दूर करे, उसे सजा दिलवाए और गद्दारी की प्रवृति को पनपने से कठोरता पूर्वक रोके।
बड़नगर, उज्जैन में 1956 ई. विजयादशमी को जन्म। प्रारंभिक शिक्षा रेलवे में कार्यरत पिता के साथ गुजरात के विभिन्न अंचलों में। 1964 से रा.स्व. संघ के स्वयंसेवक। अनंतर इंदौर के गुजराती कॉलेज से एम.कॉम.। छात्र संघ अध्यक्ष। ग्राम्य अर्थव्यवस्था व प्रबंधन में विशेषज्ञता। शौकिया पायलट। कुछ आजमाइश नौकरी व उद्योग-धंधों में।
जन अभियान परिषद् (स्वयंसेवी संगठनों के दर्शन और व्यवहार को क्रियारूप देने का प्रयास करनेवाली म.प्र. की संस्था) के रचनाकार। नर्मदा समग्र के संस्थापक। पर्यावरणविद्। स्फुट सामयिक निबंध व कविताएँ प्रकाशित। भारतीय लोक व शिष्ट परंपरा के अध्येता। मासिक ‘चरैवेति’ के पूर्व संपादक। संप्रति राज्यसभा सांसद।
प्रकाशित पुस्तकें—
1. सृजन से विसर्जन तक
2. नर्मदा समग्र
3. शताब्दी के पाँच काले पन्ने (सन् 1900 से सन् 2000)
4. सँभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से
5. महानायक चंद्रशेखर आजाद
6. रोटी और कमल की कहानी
7. समग्र ग्रामविकास
8. अमरकंटक से अमरकंटक तक
9. Beyond Copenhagen
10. Yes I Can, So Can We

Jagadguru Sankracharya
Dr Hedgevar
Geet Gunjan
Indulal Yagnik
Veer Hakikat Rai
Chintansarita 2
Hindu Navotthan
Prarthna Ek Mantra
Chintansarita 1
Samrat Chandragupt Maurya 




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