| ISBN | 9789353222260 |
|---|---|
| Lekhak | |
| Prakashak |
1947 के बाद का भारत
500.00
स्वतंत्र भारत की यह तथ्यपरक गाइड हमें उन घटनाओं और व्यक्तियों तक ले जाती है, जिन्होंने सन् 1947 के बाद के 70 वर्षों में भारत को आकार दिया है। स्वतंत्रता दिवस से शुरू होकर वह उन दशकों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है, जिनमें यह उपमहाद्वीप में प्रजातंत्र का उदय, आत्म-निर्भरता के विचार से प्रेरित एक अर्थव्यवस्था का एक ऐसी अर्थव्यवस्था में रूपांतरण, जो वर्ष 1990 के दशक के आर्थिक सुधारों से संचालित हो तथा अब भी जारी उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण, जिन्होंने भारत की विकास दर में वृद्धि की—इन सभी का साक्षी रहा है। यह पुस्तक एक दल के प्रभुत्ववाले युग से गठबंधन की राजनीति के युग में संक्रमण को भी रेखांकित करता है।
कालक्रम से व्यवस्थित : 1947 से भारत कृषि, पुरातत्त्व और कला से लेकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खेल व युद्धों और बीच में अन्य सभी विषयों की एक विस्तृत शृंखला को शामिल करता है। प्रत्येक पृष्ठ पर आजादी और दिलचस्प लघु सूचना की एक अलग पंक्ति वाली रूपरेखा मुख्य घटनाओं को आकर्षक व पठनीय बनाती है।
गोपा सभरवाल का कॅरियर व अभिरुचियाँ नाना प्रकार की हैं। वे भारतीय समाज की बहुआयामी विविधताओं का अध्ययन करती हैं—भारत-केंद्रित टी.वी. शो के सृजन और निर्देशन द्वारा; कर्नाटक के शहरी भागों की जातीय पहचान द्वारा या समाज के इतिहास का खाका खींचकर।
सन् 1993 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज में समाज-शास्त्र विभाग स्थापित किया। वे सन् 2006 में फुलब्राइट स्कॉलर रहीं। वर्ष 2010 से 2016 तक वे नालंदा विश्वविद्यालय की संस्थापक कुलपति रहीं—उसे 21वीं शताब्दी के अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय का स्वरूप देने में सक्रिय रहीं।
उन्हें ‘एथनिसिटी एंड क्लास : सोशल डिविजन्स इन एन इंडियन सिटी’; ‘दि इंडियन मिलेनियम : ए.डी. 1000-2000’ तथा खूब बिकनेवाली प्रश्नोत्तरी की कई पुस्तकें लिखने का गौरव प्राप्त है।

Indulal Yagnik
Chintansarita 2
Bhagat Singh
Veer Hakikat Rai
Chintansarita 3-4
Jam Ranji
Vibhajan ni karunantika
Geet Gunjan
Mahan Guru Govind Sinh
Aapna Utsavo
Gangasati
Aapni Rastriyata
Jagadguru Sankracharya
Letters From Andaman
Samrat Chandragupt Maurya
Ek Samarpit Vyaktitva Pandit Dindayal Upadhyay
Rashtriya Swayamsewak Sangh 



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