| Lekhak | |
|---|---|
| ISBN | 9789390315567 |
| Prakashak |
5 सरसंघचालक
200.00
विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में आरंभ से ही व्यक्ति विशेष के बजाय उसके कार्य को महत्त्व देने की परंपरा रही है। इसीलिए संघ ने किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि भगवा ध्वज को अपना गुरु माना है। यही कारण है कि सरसंघचालकों द्वारा किए गए कार्यों और उनके जीवन के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। जानकारी कम होने के कारण लोगों के मन में कई प्रश्न उठते हैं और कही-सुनी बातों पर ही कई धारणाएँ भी बना ली गई हैं, जिनमें से अधिकतर भ्रांतियाँ हैं। मसलन एक धारणा यह है कि संघ में सरसंघचालक के पास सबसे ज्यादा शक्तियाँ होती हैं। लेकिन क्या वाकई यह सच है? अंततः संघ के आज के स्वरूप को गढ़ने में सरसंघचालकों की भूमिका और योगदान क्या है? क्या संघ में सरसंघचालक स्वयंसेवकों को चलाते हैं या स्वयंसेवक सरसंघचालक को चलाते हैं? इन प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए पाँच सरसंघचालकों की जीवनयात्रा को समझना होगा। इस यात्रा के माध्यम से ही आप संघ की दीर्घ यात्रा को भी और गहरे से जान पाएँगे।

हिन्दू राष्ट्र स्वप्नद्रष्टा बंदा वीर बैरागी
Mari Jammu Kashmir Pravash Katha
Samrat Chandragupt Maurya 




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