Nutan Sadi Ke Navneet Shri Guruji

Nutan Sadi Ke Navneet Shri Guruji

350.00

ISBN

9789390366088

Lekhak

Prakashak

डॉ धनंजय गिरी

चिंतन और कर्म की त्रिज्या बड़ी कर वृत्त बड़ा करना ही जीवन-ध्येय है। यह जीवन-वृत्त निरपेक्ष नहीं है। जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता। जीवन स्वयं ही एक लक्ष्य है। संज्ञा और सर्वनाम सभी सापेक्ष शब्द हैं। आत्मालाप, आत्मस्तुति, आत्मप्रवंचना से अलिप्त जागतिक अराजकता से दूर, जीव और जगत के अंतर्संबंध को महसूसते सत्य को अपने पक्ष में करने के बजाय, सत्य के साथ खड़े होने की तैयारी।

जन्मतिथि : 13 मई, 1978

शिक्षा : एम.ए. हिंदी

शोध : इक्कीसवीं सदी की
चुनौतियाँ और गुरुजी (माधवराव सदाशिव गोलवलकर)
की प्रासंगिकता विषय पर पी-एच.डी.।

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