| By Author | Nana Deshmukh |
|---|---|
| ISBN | 9789350480373 |
| Language | Hindi |
| Publisher | Prabhat Prakashan |
| Edition | 1st |
| Publication Year | 2011 |
| Number of pages | 208 |
| Binding Style | Hard Cover |
Rashtriya Swayamsewak Sangh
250.00
संघ का विश्वास है कि राजनीति किसी राष्ट्र के जीवन का अभिन्न अंग होती है, परन्तु राष्ट्र का सम्पूर्ण जीवन राजनीति ही नहीं हैं। सामाजिक परिवर्तन केवल राजनीति के माध्यम से नहीं लाए जा सकते। उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जनसाधारण की शक्ति अर्थात् लोकशक्ति को जाग्रत् करना होगा और लोकशक्ति को सत्ता की राजनीति के माध्यम से जाग्रत् नहीं किया जा सकता। सत्ता की राजनीति जीवन का सार या एकमात्र उद्देश्य नहीं है और न इसे सर्वशक्तिमान माना जा सकता है। समाज की शक्ति राज्य की शक्ति से ऊपर होती है।
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| By Author | Nana Deshmukh |
|---|---|
| ISBN | 9789350480373 |
| Language | Hindi |
| Publisher | Prabhat Prakashan |
संघ का विश्वास है कि राजनीति किसी राष्ट्र के जीवन का अभिन्न अंग होती है, परन्तु राष्ट्र का सम्पूर्ण जीवन राजनीति ही नहीं हैं। सामाजिक परिवर्तन केवल राजनीति के माध्यम से नहीं लाए जा सकते। उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जनसाधारण की शक्ति अर्थात् लोकशक्ति को जाग्रत् करना होगा और लोकशक्ति को सत्ता की राजनीति के माध्यम से जाग्रत् नहीं किया जा सकता। सत्ता की राजनीति जीवन का सार या एकमात्र उद्देश्य नहीं है और न इसे सर्वशक्तिमान माना जा सकता है। समाज की शक्ति राज्य की शक्ति से ऊपर होती है। जब जयप्रकाश बाबू लोकशक्ति की बात करते थे और यह कहते थे कि राज्य की शक्ति जो जनता पर निर्भर करती है तो वे इसी सिद्धांत का प्रतिपादन कर रहे होते थे।
| By Author | Nana Deshmukh |
|---|---|
| ISBN | 9789350480373 |
| Language | Hindi |
| Publisher | Prabhat Prakashan |

Jam Ranji
Rashtriya Swayamsewak Sangh
Chintansarita 2
Mari Jammu Kashmir Pravash Katha
Ek Sarthak Vikalp Ekatma Manav Darshan
Gangasati
Indulal Yagnik
Hindu Navotthan
Veer Hakikat Rai
Govind Guru
Jagadguru Sankracharya
Bhagat Singh
Mahan Guru Govind Sinh
Dr Hedgevar
Chintansarita 1 


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