| ISBN | 9789352666218 |
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| Lekhak | |
| Prakashak |
गुरु का महत्व
175.00
भारत में गुरु-शिष्य-परंपरा सदियों नहीं, युगों पुरानी है, जो आज तक कायम है। गुरु हमेशा से सफल व्यक्तित्व, परिवार, समाज और राष्ट्र की नींव तथा रीढ़ रहे हैं।
आज भले ही कुछ ढोंगी बाबाओं के चलते गुरु-संतों को शक की दृष्टि से देखा जा रहा है, परंतु इससे जीवन में गुरु के महत्त्व और उनके योगदान को कम नहीं किया जा सकता; पर ऐसे में कई सवाल अवश्य उठते हैं, जैसे—गुरु कौन है? क्यों आवश्यक है गुरु? क्या पहचान है असली गुरु की? क्या हैं असली शिष्य के लक्षण, आदि?
यह पुस्तक आपको 44 विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरुओं के माध्यम से यह जानने में मदद तो करती ही है, साथ ही जिन्हें आप गुरु रूप में पूजते व मानते हैं, उनकी स्वयं की दृष्टि में गुरु कौन है तथा कैसे थे उनके अपने गुरु के साथ संबंध, इस विषय पर भी प्रकाश डालती है।
जीवन में आध्यात्मिक उत्थान करने का मार्ग प्रशस्त करनेवाली कृति।
शशिकांत ‘सदैव’
विलक्षण एवं विभिन्न प्रतिभाओं के धनी शशिकांत ‘सदैव’ अपने व्यक्तित्व एवं विभिन्न सत्कार्यों के लिए पहचाने जाते हैं। किसी के लिए आप एक आध्यात्मिक संपादक-पत्रकार हैं तो किसी के लिए लेखक-कवि-शायर। कोई आपको आपकी प्रकाशित दो दर्जन पुस्तकों के माध्यम से जानता है तो कोई आपको एफ.एम.-टी.वी. पर मेहमान, विशेषज्ञ के रूप में पहचानता है। आप न केवल कुशल वक्ता हैं, बल्कि एक अच्छे आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक सलाहकार भी हैं। पिछले दस वर्षों से विभिन्न सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं, आश्रमों, स्कूल-कॉलेज एवं मल्टी नेशनल कंपनियों में लोगों को ध्यान एवं व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण दे रहे हैं। वर्तमान में पिछले 15 वर्षों से आध्यात्मिक पत्रिका ‘साधना पथ’ में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। विस्तृत परिचय के लिए लॉग इन करें—
http://shashikantsadaiv.blogspot.com

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